Sunday, 4 November 2012

Haryana labelled 'balatkar Pradesh' for crimes on Dalits


Dubbing Congress-ruled Haryana as a "Balatkar Pradesh", the National Commission for Scheduled Castes (NCSC) today expressed concern over spurt in crimes against dalits in BJD-governed Odisha where a cabinet minister is booked on criminal charges for alleged casteist remarks.

Thursday, 18 October 2012

भारतीय समन्वय संघठन के लांगमार्च (पंजाब केसरी मे आई न्यूज देखने के लिये यहा क्लिक किजीये
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कविता जाटव (9873265054 )
कमांडर (महिला विंग - हरियाणा प्रदेश)
भारतीय समन्वय संगठन(लक्ष्य)
भारतीय समन्वय संगठन(लक्ष्य) के चीफ कमांडर : खजानसिंग

दलीतो पर अत्याचार के विरोध मे भारतीय समन्वय संगठन का लॉंगमार्च

जय भीम साथियों,
 दिनांक 14 अक्टूबर  2012 (रविवार)  को  भारतीय समन्वय संगठन(लक्ष्य)  के कार्यकर्ताओ ने हरियाणा प्रदेश में दलित महिलाओ के साथ लगातार हो रही गैंग रेप कि घटनाओ को लेकर एक आक्रोश रैली फरीदाबाद में आयोजित की ! रैली में प्रदेश सरकार के खिलाफ नारे लगाकर आक्रोश जताया गया ! इस आक्रोश रैली में महिलायों और बच्चो ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और जिला उपायुक्त को एक ज्ञापन सौपा !

रैली को सफल बनाने के लिए सभी साथियों का धन्यवाद्  !  


भवदीय
कविता जाटव (9873265054 )  कमांडर
(महिला विंग - हरियाणा प्रदेश) भारतीय समन्वय संगठन(लक्ष्य)

                                                                                                                                 
                                                      

                                                                                                     
                                                                                            
                                                                                         
                                                                                          

Sunday, 23 September 2012


हिसार। हरियाणा की हुड्डा सरकार के शासन में दलितों पर अत्याचार कम नहीं हो रहा है। नया मामला है हिसार के डाबडा गांव का। बताया जाता है कि एक दलित नाबालिग लड़की का गैंगरेप किया गया। गैंगरेप का आरोप गांव के अगड़ी जाति के 8 लोगों पर लगा है।
जब पीड़ित के पिता पुलिस में जाने की तैयारी करने लगे तो अगड़ी जाति के लोगों ने उनपर ऐसा न करने का दबाव बनाया। लेकिन जब लड़की के पिता ने उनकी नहीं मानी तो फिर उनकी तरफ से लगातार धमकी आने लगी और हालत ये हो गई कि तंग आकर पीड़ित के पिता ने जान दे दी।
इसके बाद समाज के लोगों ने खुदकुशी करने वाले शख्स की बॉडी लेकर धरना दे दिया। लोगों ने मांग की कि जबतक गैंगरेप करने वाले आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया जाता तब वो अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। आज सुबह पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

बढ़ता जा रहा दलितों का आक्रोश


कांधला(प्रबुद्धनगर)। ग्रेटर नोएडा के मंदिर में दलित समाज के लोगों को महाशिवरात्रि के पर्व पर मंदिर में जल नहीं चढ़ाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। गुरुवार को गंगेरू में दलितों ने पंचायत कर पांच दिन के अंदर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई न होने पर धर्मपरिर्वतन करने कर चेतावनी दी थी। शुक्रवार को फिर दलित समाज के सैकड़ों लोगों ने पंचायत कर निर्णय लिया कि आरोपियों के खिलाफ कार्यवाही न हुई तो आगामी 22 जुलाई को कांधला में समाज की एक महापंचायत की जाएगी, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी।
पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के गृहक्षेत्र बादलपुर के भोलरावल गांव के दलित समाज के लोगों को महाशिवरात्रि पर गांव के प्राचीन शिवमंदिर में जल न चढ़ाने की चिगंारी जनपद प्रबुद्धनगर तक पहुंची। गुरुवार को गंाव गंगेरू में दलित समाज ने पंचायत कर इस मामले की निंदा करते हुए चेतावनी दी थी कि अगर पांच दिन के अंदर आरोपी पुजारी व उसके समर्थकों के खिलाफ कार्यवाही नहीं हुई तो समाज के सैकड़ों लोग धर्म परिर्वतन करने को विवश होंगे। शुक्रवार को फिर गांव गंगेरू में दलित समाज की क्षेत्र के लोगों की पंचायत हुई। पंचायत में आगामी 22 जुलाई को कांधला में समाज की एक महापंचायत की जाएगी, जिसमें समाज के आगे की रणनीति तैयार की जाएगी। पंचायत की अध्यक्षता कृष्णपाल सिंह और संचालन सुरेंद्र सिह ने किया। पंचायत में मोहर सिंह, ताराचंद, इंद्र, विनिता, बबीता, सुमेर सिंह, भोला, गीता, अनीता, धर्मपाल, पूरण, ओमप्रकाश, अमित, कौशल सहित आदि मौजूद रहे।
हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता गंगेरू पहुंचे
कांधला: ग्रेटर नोएडा के एक मंदिर में पुजारी व उसके समर्थकों द्वारा दलित समाज के लोगों को शिवरात्रि पर जल नहीं चढ़ाने देने के विरोध मे गंगेरू के सैकड़ों ग्रामीणों द्वारा धर्म परिर्वतन की चेतावनी देने के मामले में विहिप व बंजरग दल के कार्यकर्ता शुक्रवार को गांव पहुंचे। विहिप के जिलाध्यक्ष डा. सुभाष मलिक ने बताया कि आरोपी पुजारी ने दलित समाज के लोगों से माफी मांग ली है। मंदिर कमेटी ने भी आरोपी पुजारी को मंदिर से हटा दिया है और शीघ्र ही उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराकर जेल भिजवाया जायेगा। उन्होंने दलित समाज के लोगों से धर्मपरिवर्तन नहीं करने की अपील की। इस दौरान प्रंातीय धर्मप्रमुख वीरसैनमानव, मेगपाल, नरेंद्र सिंह, राजपाल सिह, कमल, श्रीपाल, सहित आदि कार्यकर्ता मौजूद रहे।

दलितों ने दी धर्म परिवर्तन की चेतावनी


बाबरी : अलीपुर कलां गांव में चार दिन पहले जाट समुदाय से हुई मारपीट के बाद रविवार को एसडीएम और सीओ की मौजूदगी में कई गांवों दलितों ने पंचायत की। दलितों ने पुलिस और प्रशासन पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए धर्म परिवर्तन की चेतावनी दी। इससे पहले रविवार को एक दलित महिला को कूड़ा डालने से जाट समुदाय के लोगों द्वारा रोकने पर विवाद और बढ़ गया था, जिसे पुलिस ने संभाल लिया।
अलीपुर कलां में जाट समुदाय से विवाद के चलते दलितों ने गांव में रविवार को पंचायत की। पंचायत में दलितों ने पुलिस-प्रशासन पर उपेक्षा व स्वर्णो पर उत्पीड़न का आरोप लगाया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर हालात नहीं सुधरे तो अलीपुर कलां, बुड़ीना कलां, तितावी, धौलरी, साल्हाखेड़ी आदि गांव के सभी दलित इस्लाम धर्म कबूल कर लेंगे। एसडीएम सदर एसबी सिंह व सीओ भवन अजितेंद्र विजय के समक्ष दलितों ने कहा कि उनके साथ मारपीट की गई, जिसमें पांच-छह लोग घायल हुए। कहा कि जाट समुदाय के हमले के डर से वह बीमार लोगों सोना व ब्रिजेश आदि को अस्पताल नहीं ले जा पा रहे। इस अवसर पर रविंद्र कुमार, राजेश, देवी सिह, ब्रह्म सिंह, मूलचंद, अजय, सुमेर, उदयवीर, सतीश आदि मौजूद रहे। इधर, राजीव के घोड़े की शनिवार शाम बीमारी के चलते हुई मौत के बाद उसके शव को पुलिस की मौजूदगी में दफनाया गया।
कूड़ा फेंकने से रोकने पर विवाद
अलीपुर कलां में एक दलित महिला कूड़ा डालने जा रही थी। आरोप है कि जाट समुदाय के कुछ युवकों ने उसको रोक दिया। इस बात को लेकर हंगामा हो गया और तनाव का माहौल बन गया। दलितों ने बस्ती की गली में बोगी खड़ी कर दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने दोनों पक्षों के लोगों को समझाकर मामला शांत कराया। दलित समुदाय का कहना है कि सुरक्षा के लिए उन्होंने बोगी खड़ी की, जबकि जाट समुदाय ने दलितों पर हमले की तैयारी करने का आरोप लगाया। पुलिस ने दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर शांत किया। बता दें कि शनिवार शाम को बसपा सांसद कादिर राना व बसपा जिलाध्यक्ष रविंद्र गौतम आदि के पहुंचने के बाद दलित समुदाय में उबाल आ गया था। वह हथियार लेकर सड़कों पर आ गए थे।
इनका कहना है..
स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने का मामला व्यक्तिगत है, अगर कोई जबरदस्ती करता है या दबाव बनाता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

आजादी के 65 वर्षों में दलितों की लगातार अनदेखी

भारत की आजादी की जंग में हर गरीब-अमीर ने अपना खून बहाया था। 15 अगस्त 1947 को आजादी के दिन प्रत्येक व्यक्ति को गर्व था कि आज हम आजाद भारत के नागरिक हैं। अब कोई छोटा-बड़ा नहीं है, सब बराबर हैं, सबके अधिकार बराबर है। हम सब अपने देश के विकास के लिए मिलकर काम करेंगे और भारत को पुन: सोने की चिड़िया बनायेंगे। इस सोच को लेकर यहां विकास योजनाएं बनाई गईं वहां अपने देश के गरीबों के हित में भी विचार हुआ जो सदियों से दमित थे, उन्हें भी देश की मुख्यधारा में लाने के लिए समाज कल्याण के कार्यों में तेजी लाई गई। दलितों को संरक्षण दिया गया। उनके लिए शिक्षा के दरवाजे खोले गये। इन सब कार्यों पर यदि नजर डाली जाए तो आज भी ऐसा लगता है कि जो देश-भक्ति आजादी के समय थी वह इन 65 वर्षों में समाप्त सी हो गई हैं, क्योंकि जो सदियों पहले जाति-पांति का कोढ़ था वहीं बीमारी पुन: जागृति हो गई है। जो आजादी के समय भारतवासी सभी भाई-भाई का नारा लगाते थे, अब वहीं सब राष्ट्रीय एकता भूल गये हैं। प्रत्येक भारतीय को साक्षर बनाना था। गरीब बच्चों को शिक्षा में प्राथमिकता की जरूरत थी। इसलिए 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए नि:शुल्क और अनिवार्य शिक्षा नीति बनाई गई, परंतु उच्च वर्ग के दिल में गरीबों के प्रति मानसिक घृणा घर कर गई। उन्होंने उद्योगीकरण को बढ़ावा दिया और दलितों की लगातार अनदेखी की गई।
आज वास्तविकता यह है कि शिक्षा का भी व्यवसायीकरण हो रहा है, जिसमें केवल धनाढय वर्ग के लोग ही स्कूल एवं विश्वविद्यालय खोल रहे हैं, यहां प्रवेश के समय ही हजारों-लाखों रुपये फीस तथा बिल्डिंग फंड के बहाने वसूले जाते हैं। ऐसी स्थिति में गरीबीरेखा के नीचे रह रही जनता अपने बच्चों को इन स्कूलों में कैसे प्रवेश करवा सकती है। आज के वैज्ञानिक युग में शिक्षा मानव जीवन का एक आवश्यक अंग बन गया है। भारत की 70 प्रतिशत आबादी गांव में रहती है। दूर-दराज क्षेत्रों में आज भी प्राथमिक शिक्षा के लिए स्कूल नहीं हैं। एक अध्ययन में यह भी पाया गया कि जहां स्कूल हैं वहां मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। कई स्कूल टैंटों में चल रहे हैं तो कई पेड़ों के नीचे। बारिश के दिनों में यह स्कूल बंद रहते हैं। कई एक स्कूलों में तो एक ही शिक्षक है तो कहीं बगैर शिक्षक के ही स्कूल चल रहे हैं। इन्हीं कारणों से बड़ी संख्या में छात्र कक्षा 5 तक पहुंचने से पहले ही पढ़ाई छोड़ देते हैं। एक सर्वेक्षण के अनुसार सरकारी स्कूलों में दलितों एवं पिछड़ों के बच्चों की गिनती 87 प्रतिशत और अन्य वर्ग के बच्चों की गिनती 13 प्रतिशत है। ऐसे में निम्न वर्ग के बच्चे दूसरों के साथ कैसे प्रतियोगिता में सामान्य रह सकते हैं। इन परिस्थितियों में मलाई-मार के खाने वाले लोग तरस योग बच्चों से यह आशा करते हैं कि वे भी पब्लिक स्कूलों में बड़े बच्चों का मुकाबला करें, यह मुमकिन नहीं है। देश का विकास तभी होगा जब शिक्षा नीति सबके लिए एक जैसे होगी।